आज कल पाँव जमीं पर नही पड़ते मेरे . . .

आज कल पाँव जमीं पर नही पड़ते मेरे,
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए?

आज जबसे इस लम्हे को मैंने अपने कैमरे मैं कैद किया हे बस तभी से ये दो पंक्तियाँ गुनगुनाये जा रहा हूँ।
गीतकार
 : गुलज़ारगायक : लता मंगेशकरसंगीतकार : राहुलदेव बर्मनचित्रपट : घर। 

8 comments:

Hello, Please Share Your Thoughts with Us. . .