बादल, बिजली, हवा और मैं।

thunderstorm lightning Jaipur
Took this shot yesterday night from my bedroom window, Jaipur. It was a single 9sec exposure with: Camera- Canon EOS 550D, Lens- EF50mm f/1.8 II, Exposure- 9.0 sec;   f/22;   ISO 100; Manual; Spot metering. Took it without the tripod, just held the Camera steady with the support of window.
रात के 2 बज गए थे, नींद का नामोनिशां दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था। तभी मेरी खिड़की पर हवा ने दस्तक दी और बादलों ने आवाज़ दे कर मुझे पुकारा। आवारगी तो जैसे नस नस में भरी हुई है, तुरंत तैयार हो गया सड़कों की ख़ाक छानने के लिए। मैं जैसे ही पलंग से उठने को हुआ महसूस हुआ की मेरे कुर्ते का एक कोना मेरे ढाई साल के लाल के हाथ में है। खिड़की से छन के आती हुई सरकारी खम्बे की रौशनी में मैंने अपने लाल की ओर देखा तो वो इत्मिनान की नींद सो रहा था। अचानक से बादलों ने मुझे फिर से आवाज़ लगाई, इस आवाज से मेरा नौ निहाल थोड़ा कसमसाया और अपनी मुट्ठी को और ज़ोर से बंद कर लिया, जिस में मेरे कुर्ते का कोना अब भी अटका हुआ था।

मैं कुछ देर तो वहीं बैठा रहा और मेरे सारे पुराने दोस्त मुझे बुलाते रहे। फिर मैंने धीरे से अपने कुर्ते का कोना उस की मुट्ठी से निकाला और खिड़की पर जा कर सभी दोस्तों से कहा 'अब मैं पापा बन गया हूँ।'
* पदमजा जी का बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने इस लेख को संपादित किया।

2 comments:

  1. thats such a cool pic
    keep in touch
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