Friday, 21 July 2017

Dancing the Gods - Kathak performance by Rashmi Uppal

Dancing the Gods - Kathak performance by Rashmi Uppal
"Times Jaipur Festival"
Dancing the Gods - Kathak performance by Rashmi Uppal at Harishchandra Totuka Bhawan, Jaipur. 

BJP President Amit Shah in Jaipur.

BJP chief Amit Shah in Jaipur.
Hoardings, Cutouts, Flags . . . . everywhere in Jaipur to Welcome BJP President Amit Shah. Who has landed in Jaipur for his 3 day Rajasthan Visit.

Thursday, 20 July 2017

एक चित्र।

इस चित्र मैं चित्रित्त यह औरत काल्पनिक है।  इस औरत की सरूपता या मेल किसी भी जीवित या मृत औरत से हो जाये तो वो केवल एक संयोग होगा। खास तौर पे उस औरत से जो की कल दोपहर को अपने बच्चे को बगल वाली सीट पे बैठा कर कंधे और कान के बीच फ़ोन दबाये हुए लापरवाह तरीके से गाडी छोटे बच्चों के स्कूल के सामने रिवर्स मैं चला रही थी। और जब मैंने उससे अपनी गाड़ी में बैठे हुए इशारे से पूछा की तुम ये क्या करने की कोशिश कर रही हो? तब उसने मुझे इस खौफनाक तरीके से देखा की मेरी तो रूह ही काँप उठी। 

खैर कल शाम को में मेरे चार साल के नौ निहाल के साथ चित्रकारी कर रहा था और में एक लापरवाह - क्रूर औरत का चित्र बनाने मैं मशगूल था। तभी मेरे नौ निहाल ने मुझसे पूछ लिया की पापा ये आप किस की तस्वीर बना रहे हो और मैंने भी प्रशन पे बिना जयादा गौर किये कह दिया चुड़ैल की। ये सुनते ही वो बोल उठा ओह मम्मी की ! तभी मुझे एहसास हो गया की अब से मुझे मेरी बीवीजी को कमसे कम इसके सामने तो चुड़ैल बोलना बंद करना पड़ेगा। 

Wednesday, 19 July 2017

मेरे माठ साब का झोला।

मेरे माठ साब का झोला।
मेरे माठ साब का झोला मुझे उस मोटी औरत की जीन्स की तरह लगता है। जो की दुनिया के सारे दुख दर्द सह कर भी इसी जद ओ जहद में लगी रहती हे की वो औरत उस मैं किसी तरह से ठंसी रहे। मुझे यकीन हे ऐसा व्यंग्घम दृश्य देख के आप का मन भी करुणा से पसीज उठता होगा, और आप उसे मन ही मन यही झूठी सांत्वना देने की कोशिस करते होंगे की तुम हिम्मत ना हारना 'ओ जीन्स' ये औरत एक दिन पतली होगी।


Mobile photography, Shot taken at Indian Coffee House, Jawahar Kala Kendra, Jaipur.

Tuesday, 18 July 2017

आज बड़ी मुख़्तसर सी बारिश थी।

आज बड़ी मुख़्तसर सी बारिश थी।
में सोचता हूँ की कोई भी बारिश मुकम्मल तब तलक नहीं हो सकती जब तक उसे महसूस न किया जाए। एक बारिश को मुकम्मल उसे महसूस करने वाला ही बनाता है। अगर किसी बारिश को कोई महसूस करने वाला नहीं तो वो बस पानी की कुछ बूंदो की एक मुख़्तसर सी कहानी बन के खो जाती है। आज की बारिश शायद एक ऐसी ही मुख़्तसर सी कहानी थी, जिसका होना बस होने के लिए था। 

वरना आप ही सोचिये क्या कभी ऐसा हो सकता हे की बारिश हो और कोई एहसास पैदा न हो? एहसास होंगे तो उसे महसूस करने वाले भी होंगे और बारिश खुद ब खुद मुकम्मल हो जाएगी। एक ज़माना था जब बारिशें होती थी और एहसास खुद ब खुद पैदा हो जाते थे। कहीं ऐसा तो नहीं आज कल की बारिशों में एहसास पैदा करने वाला जज़्बा ही नहीं रहा? क्या ये भी हमारी तरह आधुनिकता की दौड़ में अपने होने के असल कारण को ही भूल गयी? 

हाँ यही कारण सही जान पड़ता है, शायद आज कल की बारिशें भी आधुनिक हो गयीं। 

Thursday, 6 July 2017

Studio.

Shot taken at the Studio of Arvind Jodha and Anjali Shekhawat.  #MobilePhotography

Wednesday, 5 July 2017

Caged for Amusement.

Caged for Amusement at a Resort on Jaipur - Delhi Highway.

Mobilephotography